राजनीती में चारित्रिक मापदंड
राजनीती में चारित्रिक मापदंड एक स्वथ्य और लोकतान्त्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है | राजनीती में नेता का चरित्र जनता के भरोसे का मुख्य आधार होता है | नैतिक रूप से मजबूत नेता ही समाज में ही सही सन्देश दे सकता है , ईमानदारी और सत्य निष्ठा राजनीतिज्ञों का सबसे बड़ा आभूषण होता है , चरित्रवान नेता सत्ता का प्रयोग निजी स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि जनकल्याण के लिए करते है | राजनीती में पारदर्शिता का अर्थ कार्यो में स्पष्टता और चरित्र में ईमानदारी नैतिक नेतृत्व जनता का राजनीती पर भरोसा बहाल करता है | एक आदर्श नेता को लोभ मोह अहंकार से ऊपर उठकर कार्य करना चाहिए |

जनप्रतिनिधि वह नीव है जिस पर एक समृद्ध राष्ट्र का निर्माण होता
चरित्रवान नेता ही युवा पीढ़ी के लिए रोल मॉडल होते है उनकी सुचिता ही लोकतंत्र मजबूत होता है | सशक्त लोकतंत्र के लिए चरित्रवान जनप्रतिनिधि वह नीव है जिस पर एक समृद्ध राष्ट्र का निर्माण होता है , परन्तु आज की राजनीती में यह सिर्फ सुनने को मिलता है पर देखने क़ो बिलकुल मिलता नहीं है |

राजनितिक मर्यादा की चिंता नहीं
आज हम वैसे ही एक राजनेता की बात करने वाले हैं जिसने राजनीती की मर्यादा की चिंता तो कभी की ही नहीं है |
गिरिधारी यादव (जन्म 14 अप्रैल 1961) एक भारतीय राजनीतिज्ञ, संसद सदस्य (लोकसभा) और जनता दल (यूनाइटेड) राजनीतिक दल के सदस्य हैं। वे बिहार के बांका लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। यादव चार बार लोकसभा और चार बार बिहार विधानसभा के लिए चुने गए हैं। गिरिधारी यादव समाजवादी वर्ग के राजनीतिज्ञों से संबंध रखते हैं। वे राजीव गाँधी के कार्यकाल के दौरान युवा कांग्रेस में थे उसके बाद इनका जुड़ाव वीपी सिंह जैसे नेताओं से भी रहा |
कटोरिया विधानसभा की उम्मीद
1995 में इन्हे बिहार के कटोरिया विधानसभा से चुनाव लड़ने का मौका मिला और जीत भी हासिल किये | कटोरिया विधानसभा जीतने के बाद इन्होने लोकसभा लड़ने का फैसला किया और बांका लोकसभा शानदार जीत हासिल कर 11 वी लोकसभा के सदस्य बने| 1997 में, गिरधारी यादव उन सत्रह लोकसभा सांसदों में से एक थे जिन्होंने नई दिल्ली वीपी सिंह की पार्टी जनता दल से अलग होकर राष्ट्रीय जनता दल का गठन किया जिसके सुप्रीमो आज तक घोटाला सम्राट लालू यादव है | लेकिन वे राजद के टिकट पर 12 वी लोकसभा का चुनाव दिग्विजय सिंह से मामूली 1% से भी कम अंतर से हार गए | लेकिन फिर 2000 में बिहार के कटोरिया से फिर विधायक दूसरी बार चुने गए |

लोकसभा चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन
2004 में, यादव ने दिग्विजय सिंह को हराकर 14 वी लोकसभा के लिए चुनाव जीता । सांसद रहते हुए आरजेडी द्वारा पार्टी टिकट न दिए जाने के बाद, गिरिधारी यादव का लालू यादव से मतभेद हो गया और 2010 में, गिरधारी यादव जनता दल यूनाइटेड नितीश कुमार जी की पार्टी का दामन थाम लिया और बिहार के बेलहर विधानसभा के लिए निर्वाचित हो गए | वे 2014 में जनता दल यूनाइटेड के महासचिव बने । गठबंधन के आरजेडी नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन के साथ मेलजोल के आरोप में नोटिस जारी होने के बाद यादव ने 2015 में इस पद से इस्तीफा दे दिया। लेकिन उन्होंने 2015 में बिहार के बेलहर विधानसभा से चौथी बार निर्वाचित हुए | राजनीती में तोड़ जोड़ मन मर्यादा जनभावना बाद में पहले विधानसभा और लोकसभा में जगह मिले ये सर्वोपरि रहा |
2019 में उन्होंने रिकॉर्ड बहुमत से बांका से 17 वी लोकसभा के लिए रिकॉर्ड मतों से चुनाव जीता और वित्त सम्बन्धी संसदीय स्थाई समिति में भी अपनी सेवाएं दी | 2024 में फिर बांका लोकसभा से 18 वी लोकसभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए |
धितराष्ट्र भी हुए शर्मसार
इतने बेमिसाल राजनितिक सफर होने के वावजूद गिरधारी यादव अपनी विरासत क़ो कही न कही वो गरिमा वो प्रतिष्ठा प्रदान करने में नाकाम साबित हो रहे है , गिरधारी यादव अपने कद का इस्तेमाल करते हुए बड़ी मसक्कत के बाद अपने बेटे चाणक्य प्रकाश को राजद से टिकट दिलाने में कामयाब रहे , यहाँ तक तो सब ठीक था परन्तु अपने बेटे को जीत नहीं दिला सके , जबकि आरोप ये लग रहे है की चुनाव के दौरान जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार मनोज यादव के प्रचार प्रसार में न शामिल होकर अपने जिगर के टुकड़े को कैसे विधानसभा भेजा जाये उसमे व्यस्त दिखे ऐसा आरोप उनके यानि जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता सुपौल लोकसभा के संसद दिलेश्वर कामत ने लगाया है | इनका साफ कहना है की ये पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल रहे है । और इनकी सदस्य्ता रद्द की जाये | जनता दल यूनाइटेड ने SIR का समर्थन किया था जबकि इन्होने विरोध किया |
जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय झा ने भी दिलेश्वर कामत का समर्थन किया और संजय झा ने स्पष्ट कहा की गिरधारी लाल जी का अपने पुत्र चाणक्य प्रकाश को RJD से टिकट दिलाना , और बेटे के लिए वोट मांगना जो साफ साफ दिखाता है की इनकी मनसा पार्टी से अलग होने की है |
जनता दल यूनाइटेड के सबसे वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने भी सुपौल के सांसद महोदय का पुरजोर समर्थन किया की और अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बोले की गिरधारी लाल यादव कई मौको पर पार्टी गतिविधि में संलिप्त पाए गए है और लोकसभा अध्यक्ष को भी नोटिस दे दिया गया है |



































